नागरिक कर्त्तव्य अपने कर्तव्य को जानना और उसे निभाना यह अपने आप में एक गंभीर एवं संवेदनशील विषय है। कर्तव्यों का निभाना केवल व्यक्तिगत आचरण तक सीमित नहीं माना जा सकता। हर किसी के आचरण का प्रभाव उस व्यक्ति के संपर्क में आने वाले हर व्यक्ति, परिवार, समूह, समाज, देश आदि तक पहुंचता है। व्यक्ति के व्यक्तित्व की पहचान उसके कर्त्तव्य पालन के द्वारा ही प्रकट होती है। नागरिक के नाते निभाए जाने वाले कर्तव्यों के द्वारा नागरिक अपने देश की पहचान को उजागर करता है। नागरिक कर्त्तव्यों के विषय में लिखी हुई यह पुस्तिका भारत की पहचान को भारत के नागरिक सही रूप में प्रकट कर सके एक दायित्ववान नागरिक के नाते डॉ. अशोक कुमार वाष्र्णेय द्वारा लिखी गई यह पुस्तिका इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
आज का विद्यार्थी आज का नागरिक है, इस बात का हर विद्यार्थी को भान रहे यही सोचकर लेखक ने विद्यार्थी जीवन में निभाए जाने वाले कर्तव्यों का उल्लेख करते हुए अपनी बात को प्रारंभ किया है। सनातन परंपरा का उल्लेख करते हुए लेखक ने हमें “नित्य नूतन चिर पुरातन ही सनातन है” इसका बोध दिलाते हुए हर नागरिक को अद्यतन ज्ञान-विज्ञान के प्रति जागरूक रहने का संकेत दिया है। अतः कार्यरत रहने वालों के कर्तव्यों की बात भी लेखक ने व्यवस्थित ढंग से लिखी है।
मूल्य: ₹ 25/-
पृष्ठ संख्या: 24
ISBN: 978-81984131-2-3












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