हमारे राष्ट्र निर्माताओं में जगत श्री शंकराचार्य का स्थान बहुत ऊंचा है कई विद्वानों ने उन्हें आधुनिक हिंदू धर्म का जनक भी कहा है शंकराचार्य ने समस्त हिंदू राष्ट्र को एक सूत्र में गिरोह ने एवं उसे संगठित करने का प्रयास किया और देश के चारों कोनों में चारधामों के प्रति श्रद्धा केंद्रित करते हुए उन्होंने संपूर्ण भारतवर्ष की मातृभू की मूर्ति जनजन के हृदय पर अंकित कर दीपंडित दीनदयाल उपाध्याय ने चंद्रगुप्त के माध्यम से शक्ति और नीती का संदेश दिया तो जगत गुरु श्री शंकराचार्य में ज्ञान वैराग्य और सांस्कृतिक समन्वय की उस महान परंपरा का चित्रण किया है जिसने भारत को भौगोलिक ही नहीं बल्कि वैचारिक और आध्यात्मिक स्तर पर भी एक सूत्र में बांधा आदि शंकराचार्य ने मात्र 32 वर्ष की अल्प आयु में कैसे संपूर्ण भारत की पदयात्रा द्वारा भ्रमण कर चारों दिशाओं में मठों की स्थापना की तथा राष्ट्र की सांस्कृतिक एकात्मकता को सुदृढ़ आधार प्रदान किया आज जब समाज पहचान के संकट वैचारिक विभाजन और सांस्कृतिक विस्मृति जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है तब यह कृति एकात्मकता समरसता और राष्ट्रीय चेतना का सशक्त संदेश देती है
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₹1.00जगत गुरु श्री शंकराचार्य
₹110.00₹111.00
पृष्ठ संख्या – 112
मूल्य – ₹110
आईएसबीएन नंबर – 9788168505223
| ISBN | 9788168505223 |
|---|---|
| book-author | |
| Number Of Pages | 112 |
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