कुटुंब प्रबोधन की भारतीय दृष्टि
लेखक डॉ.शिरोमणि दुबे पुस्तक यह बताती है कि एक आदर्श कुटुंब कैसा होता है, उसमें व्यक्ति की भूमिका क्या होती है, किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है और किन विषयों पर परिवार को बैठ-विमर्श-निर्णय करना चाहिए। साथ ही यह दिखाया गया है कि कैसे कुटुंब पारमार्थिक जीवन का ‘ज्योतिकलश’ बन सकता है, परिवार को एकात्मता के भाव में बनाए रखने हेतु मातृशक्ति, वरिष्ठजन, युवा-सदस्य कैसे आचरण करें ताकि सुखी समाज का निर्माण हो सके।
लेखक ने यह भी केन्द्रित किया है कि कैसे परिवारों के विघटन को रोका जाए, टूटते परिवारों की पुनर्स्थापना का संकल्प विकसित हो और भारतीय समाज विश्व-स्तर पर कुटुंब-संस्था को संस्कृतिक स्वरूप प्रदान कर सके, जिससे पर्यावरण-सुरक्षा, सामाजिक समरसता, स्वदेशी चेतना एवं नागरिक-कर्तव्य भी प्राकृतिक रूप से साकार हो सकें।









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