संघ दर्शन : अपने मन की अनुभूति
लेखक लोकेन्द्र सिंह की पुस्तक ‘संघ दर्शन’ (अपने मन की अनुभूति) वस्तुत: सभी राष्ट्रवादियों के मन की अनुभूति है। पुस्तक में संकलित और विश्लेषित लेख संघ की दृष्टि स्पष्ट करने में सक्षम हैं। प्रारम्भ में सरसंघचालक परंपरा के आदर्श हेडगेवार जी से फलते-फूलते संघ की दृष्टि को विराट वृक्ष के रूप में देखा गया है, जिनकी प्रेरणा से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, भारतीय शिक्षण मंडल, आरोग्य भारती, विद्या भारती, विश्व हिंदू परिषद, भारतीय किसान संघ, सेवा भारती, आदि राष्ट्रहित में सक्रिय हैं। संघ को समझने और संघ की दृष्टि में हिंदुत्व की संकल्पना को सरल और अल्प शब्दों में समझाने का उदार प्रयास किया गया है। हम कह सकते हैं कि आप इस पुस्तक को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को समझने का एक आवश्यक और सरल दस्तावेज़ समझ सकते हैं। संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय संयोजक श्री जे. नन्द कुमार ने प्रस्तावना में लिखा है कि मेरा विश्वास है कि यह पुस्तक संघ के दृष्टिकोण, विचारों और संघ दर्शन समझने में सभी सुधीजन पाठकों के लिए सहायक सिद्ध होगी। लेखक लोकेन्द्र सिंह ने ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ को इतनी सरलता से समझाया है कि आप अनेक प्रकार के भ्रमों के बीच भी संघ की वास्तविक प्रतिमा के दर्शन कर सकते हैं।
पेज संख्या 160
मूल्य 200/-











