धर्म की ढाल गुरु तेग बहादुर अपना शीश न्योछावर किया

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पृष्ठ संख्या 24
प्रथम संस्करण
आईएसबीएन 97881992575

धर्म की ढाल गुरु तेग बहादुर अपना शीश न्योछावर किया
लेखक एवं संपादक श्री लाजपत आहूजा
हर परिवार को यह जानना आवश्यक है कि, किस -किस महापुरुष ने, कब- कब और कैसे – कैसे हमारी अस्मिता की रक्षा की। 1000 वर्ष की पराधीनता में भी बलिदानियों की कमी भारत में कभी नहीं रही। तलवार की दम पर बड़ी मात्रा में कन्वर्जन धर्मांतरण जब हो रहे थे, ऐसे ही अंधकारपूर्ण समय में एक नक्षत्र ऐसा भी था जिसने स्वयं मृत्यु को निमंत्रण देकर स्वीकार किया। यह गुरु तेग बहादुर के सर्वोच्च बलिदान का स्मरण करने के उद्देश्य से छोटी सी पुस्तिका है।

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ISBN

97881992575

Number Of Pages

24

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