जगराम सिंह द्वारा रचित यह पुस्तक “ पंच परिवर्तन के पंच प्रण” राष्ट्र निर्माण के संदर्भ में व्यक्ति, परिवार, समाज और शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका पर गहन विचार प्रस्तुत करती है। लेखक का मानना है कि यदि भारत को सशक्त और समृद्ध भविष्य की ओर ले जाना है, तो समाज में पांच मूलभूत स्तरों पर परिवर्तन आवश्यक है। ये परिवर्तन व्यक्ति, परिवार, शिक्षा, समाज और राष्ट्र—इन पाँच आयामों में संतुलन स्थापित करने पर केंद्रित हैं।
जगराम सिंह ने उदाहरणों, प्रेरक विचारों और व्यावहारिक सुझावों के माध्यम से यह स्पष्ट किया है कि परिवर्तन की शुरुआत स्वयं से होती है और उसका प्रसार परिवार, समाज और राष्ट्र तक होता है।
यह लघु किंतु प्रभावशाली पुस्तक शिक्षक वर्ग, शिक्षण संस्थानों और समाजसेवियों के लिए प्रेरणास्रोत है। यह शिक्षा को केवल पाठ्यक्रम नहीं बल्कि “जीवन निर्माण का माध्यम” मानने का संदेश देती है।










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