पंच परिवर्तन : राष्ट्र पुनरुत्थान का पाथेय एक विचारप्रधान पुस्तक है, जिसमें राष्ट्र के समग्र विकास और पुनरुत्थान के लिए आवश्यक पाँच प्रमुख परिवर्तनों का सरल एवं प्रेरक विवेचन किया गया है। पुस्तक भारतीय संस्कृति, सामाजिक समरसता, पारिवारिक मूल्यों, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्यों तथा आत्मनिर्भर और सशक्त भारत के निर्माण जैसे विषयों पर चिंतन प्रस्तुत करती है।
लेखक ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्र का उत्थान केवल शासन की नीतियों से नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के चरित्र, कर्तव्यबोध, सामाजिक उत्तरदायित्व और सकारात्मक सहभागिता से संभव है। पुस्तक पाठकों को अपने जीवन में श्रेष्ठ मूल्यों को अपनाने तथा समाज और राष्ट्र के प्रति सक्रिय भूमिका निभाने की प्रेरणा देती है।
सरल, सारगर्भित और प्रेरणादायी शैली में लिखी गई यह पुस्तक विद्यार्थियों, शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा राष्ट्र जीवन और भारतीय चिंतन में रुचि रखने वाले सभी पाठकों के लिए उपयोगी है।










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