हम असहिष्णु लोग
लेखक लोकेद्र सिंह की ‘हम असहिष्णु लोग’ यह पुस्तक उस वक्त के घटनाक्रमों का चित्रण है, जिसने अमूमन एक साजिश के तहत इस देश की महान समरस एवं अतिउदारवादी छवि को विकृत करने का कुत्सित किंतु असफल प्रयास किया। इसमें लोकेन्द्र सिंह ने दौ सौ पृष्ठों में 73 घटनाक्रमों की जिस सटीक ढंग से व्याख्या की है, वह हर उस भारतीय को पढ़ना चाहिए जो इस राष्ट्र से प्रेम करता है। मानस के अंर्तद्वंद को खत्म कर ये लेख आपके ज्ञानचक्षु खोल देंगे।
पुस्तक का शीर्षक एक कौतुहल जगाता है। किन्तु, जब हम प्रारम्भ में ही लेखक के मन की बात और पुस्तक की पृष्ठभूमि पढ़ते हैं तो यह भली प्रकार स्पष्ट हो जाता है कि पुस्तक का शीर्षक ‘हम असहिष्णु लोग’ क्यों रखा गया है? इस शीर्षक के माध्यम से ही लेखक ने बताया है कि कुछ लोग स्वयं अराजकता फैला रहे हैं, भोली-भाली जनता को बरगलाने की कोशिश कर रहे हैं और अव्यवस्था का ठीकरा किसी और के सिर फोड़ रहे हैं। ‘हम असहिष्णु लोग’ एक ऐसी पुस्तक है, जो 2014 के बाद से देश में अराजकता फ़ैलाने के जितने भी प्रयास हुए, उनकी पड़ताल करती है। यह एक दस्तावेज है, जिसके माध्यम से हम समझ सकते हैं कि कैसे देश का कथित सेकुलर-लिबरल बुद्धिजीवी वर्ग समाज में संघर्ष उत्पन्न करता है। अपनी इस वैचारिक स्वार्थ की पूर्ति में यह वर्ग देश की प्रतिष्ठा को भी दांव पर लगाने से नहीं चूकता। देश को बांटने का काम कर रहीं ताकतों को पुस्तक में तर्क और तथ्य के साथ देश के सामने प्रस्तुत किया गया है।











Amber Jones
Such an incredibly complex story! I had to buy it because there was a waiting list of 30+ at the local library for this book. Thrilled that I made the purchase