जगत गुरु श्री शंकराचार्य

110.00111.00

पृष्ठ संख्या – 112
मूल्य – ₹110
आईएसबीएन नंबर – 9788168505223

हमारे राष्ट्र निर्माताओं में जगत श्री शंकराचार्य का स्थान बहुत ऊंचा है कई विद्वानों ने उन्हें आधुनिक हिंदू धर्म का जनक भी कहा है शंकराचार्य ने समस्त हिंदू राष्ट्र को एक सूत्र में गिरोह ने एवं उसे संगठित करने का प्रयास किया और देश के चारों कोनों में चारधामों के प्रति श्रद्धा केंद्रित करते हुए उन्होंने संपूर्ण भारतवर्ष की मातृभू की मूर्ति जनजन के हृदय पर अंकित कर दीपंडित दीनदयाल उपाध्याय ने चंद्रगुप्त के माध्यम से शक्ति और नीती का संदेश दिया तो जगत गुरु श्री शंकराचार्य में ज्ञान वैराग्य और सांस्कृतिक समन्वय की उस महान परंपरा का चित्रण किया है जिसने भारत को भौगोलिक ही नहीं बल्कि वैचारिक और आध्यात्मिक स्तर पर भी एक सूत्र में बांधा आदि शंकराचार्य ने मात्र 32 वर्ष की अल्प आयु में कैसे संपूर्ण भारत की पदयात्रा द्वारा भ्रमण कर चारों दिशाओं में मठों की स्थापना की तथा राष्ट्र की सांस्कृतिक एकात्मकता को सुदृढ़ आधार प्रदान किया आज जब समाज पहचान के संकट वैचारिक विभाजन और सांस्कृतिक विस्मृति जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है तब यह कृति एकात्मकता समरसता और राष्ट्रीय चेतना का सशक्त संदेश देती है

Category:
ISBN

9788168505223

book-author

Number Of Pages

112

Customer Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “जगत गुरु श्री शंकराचार्य”

Your email address will not be published. Required fields are marked *