भारत का जयघोष वंदे मातरम्
लेखक: डॉ. विकास दवे
वर्ष 1875 का वह कालखंड, जब संपूर्ण भारत अपनी स्वतंत्रता-समर की अग्निपरीक्षा से गुजर रहा था। उसी संघर्षमय समय में बंकिम बाबू, हाथ में कलम से कागज़ पर उकेरी वे पंक्तियाँ न केवल उस युग की आवाज़ बनीं, बल्कि आने वाले वर्षों तक इतिहास में अमिट रूप से अंकित हो गईं
वंदे मातरम् भारतीय जीवन-दर्शन का सार है। यह मातृभूमि के प्रति भक्ति, प्रकृति की आराधना, शक्ति और शांति के संतुलन, राष्ट्रीय चेतना तथा सांस्कृतिक समन्वय का अद्वितीय प्रतीक है। इसी गहन भावभूमि को लेखक ने एक संक्षिप्त किंतु प्रभावशाली पुस्तक में समेटने का प्रयास किया है।
यह पुस्तक पाठकों को राष्ट्रभक्ति की भावना से जोड़ते हुए भारतीय चेतना के मूल तत्वों का बोध कराती है।









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