राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के मर्लिन अवसर पर यह संकल्प लिया गया कि तपोनिष्ठ कार्यकर्ताओं के जीवन दर्शन और कृतित्व कू पुस्तक के रूप में संजोया जाए जिन्होंने संघ उसके अंदर स्वयं सेवक के रूप में समाज परिवर्तन की साधना में स्वयं को पूर्णतः अर्पित कर दिया भाऊसाहब भुस्कुटे इसी प्रेरक परंपरा की एक उज्वल कड़ी है
राष्ट्र जीवन में कुछ व्यक्तित्व ऐसे जन्म लेते हैं जिनका होना मात्र ही एक योग्यता सौभाग्य बन जाता है वे ना केवल अपने परिवार ना किसी एक स्थान आकार के होते हैं अपितु संपूर्ण समाज और राष्ट्र की धरोहर बन जाते हैं
यह कृति केविन जीवन ही नहीं है यह उस प्रेरणा का जीवंत प्रमाण है जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्कारों से दीक्षित एक सामान्य युवक को राष्ट्र सेवा का साधक बना बेटी है यदि इन प्रश्नों को पढ़ते हुए किसी पाठक के मन में यह प्रश्न मैं जाग उठे कि मैं समाज और राष्ट्र के लिए क्या कर सकता हूँ तो यही इस लेखन की सच्ची सार्थकता होगी इस कृति के लेखक श्री अभिषेक पवन तिवारी जी हैएम इस पुस्तक की प्रस्तावना श्री अरुण जैन , अखिल भारतीय सह प्रचारक प्रमुख है
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₹30.00संग साधना के पथिक भाऊसाहब भुस्कुटे
₹250.00₹280.00
लेखक – श्री अभिषेक पवन तिवारी जी
ISBN – 9788199790063
पेज नंबर पृष्ठ संख्या – 184
| ISBN | 9788199790063 |
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| Number Of Pages | 184 |
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