स्वास्थ्य चेतना

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स्वास्थ्य चेतना
लेखक: धीरेन्द्र सिंह पवैया

प्रष्ठ संख्या: 156

पुस्तक
स्वास्थ्य चेतना भारतीय आयुर्वेद की मूल अवधारणा “त्रिदोष सिद्धांत” पर आधारित एक महत्वपूर्ण पुस्तक है। इसमें मानव शरीर, स्वास्थ्य, रोगों के कारण तथा जीवनशैली को आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से सरल भाषा में समझाया गया है। लेखक ने शरीर और मन के संतुलन को स्वास्थ्य का आधार माना है।

आयुर्वेद के अनुसार

वात

पित्त

कफ

इन तीनों दोषों का संतुलन ही अच्छे स्वास्थ्य का आधार है, जबकि असंतुलन रोगों का कारण बनता है।

भारतीय परंपरा में दिनचर्या, ऋतुचर्या और सात्विक आहार को अत्यंत महत्व दिया गया है।
आधुनिक जीवन की अव्यवस्थित आदतें त्रिदोष को असंतुलित करती हैं।
व्यक्ति को अपने शरीर की प्रकृति पहचानकर जीवन जीना चाहिए।
यह पुस्तक केवल रोगों की जानकारी नहीं देती, बल्कि स्वस्थ जीवन जीने की भारतीय पद्धति को समझाती है। सरल भाषा और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से लेखक ने आयुर्वेद को आम लोगों तक पहुँचाने का प्रयास किया है। स्वास्थ्य, योग, भारतीय ज्ञान परंपरा तथा प्राकृतिक जीवनशैली में रुचि रखने वालों के लिए यह उपयोगी पुस्तक है।

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