हिंदू धर्म, मानव धर्म” पुस्तक के लेखक गोविंद कृष्ण भुस्कुटे एक प्रसिद्ध मराठी विचारक, लेखक और न्यायविद इस पुस्तक के माध्यम से धर्म के व्यापक और मानवीय स्वरूप को समझाने का प्रयास किया है।
संक्षिप्त विवरण
“हिंदू धर्म, मानव धर्म” में लेखक गोविंद कृष्ण भुस्कुटे ने यह दर्शाया है कि धर्म केवल कर्मकांडों, पूजा-पाठ या व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक उच्च मानवीय चेतना और नैतिकता से जुड़ा हुआ है। वे यह तर्क देते हैं कि हिंदू धर्म की मूल भावना ‘मानव धर्म’ है – जिसमें सभी मनुष्यों के लिए करुणा, प्रेम, सह-अस्तित्व और सत्य का पालन करना प्रमुख है।
भुस्कुटे जी ने वैदिक, उपनिषदिक और भगवद्गीता के सन्दर्भों के माध्यम से यह समझाया है कि धर्म का उद्देश्य आत्मा की उन्नति और समाज की भलाई है। उन्होंने अंधविश्वास, रूढ़िवादिता और सामाजिक भेदभाव की आलोचना करते हुए धर्म के आधुनिक, प्रगतिशील और सर्वसमावेशी रूप को सामने रखा है।
यह पुस्तक केवल धार्मिक विचारों का विश्लेषण नहीं करती, बल्कि एक गहरी सामाजिक चेतना भी प्रस्तुत करती है, जो आज के समय में भी प्रासंगिक है।
पेज संख्या 288
मूल्य 300/-










aslam
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