अनादि समर धर्मवीर संभाजी महाराज और मराठा पराक्रम का अनकहा इतिहास के लेखक गिरीश जोशी हैं तथा इसका प्रस्थान (भूमिका) पीवीसी मनोहर तिवारी द्वारा लिखा गया है। यह कृति भारतीय इतिहास के उस दौर पर प्रकाश डालती है जब लगभग छह–सात सौ वर्षों तक भारतभूमि को विदेशी आक्रमणों और अत्याचारों का सामना करना पड़ा।
पुस्तक में विशेष रूप से संभाजी महाराज के अद्वितीय साहस, धर्मनिष्ठा और राष्ट्ररक्षा के संकल्प का वर्णन किया गया है। उन्हें “धर्मवीर” के रूप में प्रस्तुत करते हुए लेखक ने बताया है कि किस प्रकार उन्होंने अत्याचारों के विरुद्ध डटकर संघर्ष किया और अपने प्राणों का बलिदान देकर भी धर्म और स्वाभिमान की रक्षा की।
इस ग्रंथ में मराठा पराक्रम के उन पहलुओं को उजागर किया गया है जिन्हें इतिहास में अपेक्षित स्थान नहीं मिला। यह केवल युद्धों का वर्णन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और राष्ट्रीय चेतना का भी दस्तावेज है। लेखक ने यह दर्शाने का प्रयास किया है कि विपरीत परिस्थितियों में भी भारत ने अनेक वीरों को जन्म दिया, जिन्होंने अत्याचारों का प्रतिरोध कर राष्ट्र की अस्मिता को सुरक्षित रखा।
यह पुस्तक मराठा शौर्य, त्याग और संघर्ष की अनकही गाथा को प्रस्तुत करती है तथा पाठकों में राष्ट्रीय गौरव की भावना जागृत करती है।



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