“महान सम्राट मिहिरभोज एवं राजपूत युग” लेखक – वीरेन्द्र सिंह परिहार एक ऐतिहासिक कृति है जो भारत के गौरवशाली अतीत की अनदेखी सच्चाइयों को उजागर करती है। यह पुस्तक इतिहास की उन भूलों को सुधारने का प्रयास करती है, जिनके कारण राजपूत युग और सम्राट मिहिरभोज जैसे महान नायकों का योगदान इतिहास के पन्नों में धुंधला पड़ गया था। लेखक ने प्रमाणों और तथ्यों के आधार पर यह सिद्ध किया है कि भारत का स्वर्णिम इतिहास केवल हर्षवर्धन तक सीमित नहीं, बल्कि बारहवीं शताब्दी तक फैले राजपूत युग तक निरंतर जारी रहा।
इस पुस्तक में दर्शाया गया है कि किस प्रकार भारतीय साम्राज्यों ने अरबों और तुर्क आक्रांताओं को कई बार पराजित कर देश की सीमाओं की रक्षा की। यह कृति पाठकों को न केवल अपने अतीत के गौरव से परिचित कराती है, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय गर्व और प्रेरणा का भी स्रोत प्रदान करती है।
इतिहास में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए यह पुस्तक एक मूल्यवान शोध और चिंतन का ग्रंथ है, जो भारत के भूले-बिसरे नायकों को पुनः प्रकाश में लाती है और नई ऐतिहासिक दृष्टि को जन्म देती है।








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