गुणवाचक कथाएं

160.00161.00

ISBN – 9789384563332
Pages – 140
लेखक धीर सिंह पवैया

गुणवाचक कथाएं लेखक धीर सिंह पवैया – समाज के रूप में कहानियों से समाज का मनोरंजन तो होता ही था पर वे गुणों पर भी प्रकाश डालती थी वैसा ही करने वैसा ही बनने के लिए श्रोताओं मैं प्रेरणा भी भरती थी समाज चौपाल पर बैठकर कथाओं को कहकर ज्ञान का आदानप्रदान करता था प्राथमिक विकास से लेकर के आज तक कथाओं का कहानियों का समाज निर्माण में योगदान बना हुआ है किसी भी विषय की गहन चर्चा बौद्धिक प्रवचन या भाषण किसी भी समूह में सतीक रूप से समझा कर कहानियों की भूमिका हमेशा से रही है जो कहानियों जीवन दर्शक हैं कुछ कथानक के माध्यम से समाज में हुए झगड़े फसाद को वहाँ के पंच इन्हीं के माध्यम से सुलझा दिया करते थे मानव मन में वीरता समर्पण अनुशासन समयपालन नैतिक आचरण धर्मसत्य क्षमा सदाचार सहनशीलता देशभक्ति ये सभी मानवीय गुणों का विकास करने में कथा कहानियों आज भी समर्थ हैं और इन कथाओं का मूल्य किसी भी काल में कम नहीं हुआ – श्री धीर सिंह पवैया जी ने विभिन्न गुणों का विचार करते हुए सुंदर कथाओं का संकलन इस पुस्तक में किया है इस पुस्तक की प्रस्तावना भैया जोशी सर कार्यवाह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ नहीं लिखी है इस पुस्तक की अनुसूची में 169 कथाएँ हैं

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9789384563332

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Number Of Pages

140

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