मैं मीसा बंदी लेखक रमेश गुप्ता
मीसा काल आपातकाल को अब लंबा समय बीत चुका है उसकी यादें भी शायद नई जेनरेशन पीढ़ी में धुंधला गई है वो अलग बात है कि आज भी उसकी यादें रोंगटे खड़ी कर देती हैकी यादों में से वह चला गया है और उसकी आँखों में तैर रहा है सोने में भारत स्वाधीनता का अमृत महोत्सव मना रहा भारत अब बढ़ रहा है विश्व की नेतृत्व करने की दिशा में इस पुस्तक की प्रस्तावना माननीय कृष्णकुमार अस्टाना ने लिखी है प्रस्तुत पुस्तक का दायरा सीमित है इंदौर की सेंट्रल जेल और जिला जेल के घटनाक्रम और इस महानगर में जो घटित हुआ उस पर ही अधिक प्रकाश डाला गया राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उसकी स्वयंसेवक केंद्र में रहे हैं परन्तु इंदिरा गाँधी श्रीमती इंदिरा गाँधी को अंदाजा नहीं था कि संघ के स्वयंसेवक किस मिट्टी के बने हैं? जो राष्ट्र कार्य के लिए कटिबद्ध होने के अपने संकल्प को नित्य दोहराते हैं










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